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फ्री काल सर्प दोष कैलकुलेटर

जब सातों ग्रह राहु-केतु अक्ष के एक ओर हों तो काल सर्प दोष माना जाता है। जन्म विवरण भरें और गणित पर आधारित ईमानदार उत्तर पाएं — दोष होने पर उसका प्रकार भी।

जन्म स्थान

यह जांच पूर्णतः ज्यामितीय है: राहु-केतु सदा 180° पर होते हैं, और दोष तभी बनता है जब सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि — सातों — उनके बनाए एक अर्धवृत्त में हों।

दोष होने पर राहु के भाव अनुसार बारह प्रकारों में से एक बनता है — अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर, शेषनाग।

काल सर्प ज्योतिष में परवर्ती अवधारणा है — बृहत्पाराशर जैसे शास्त्रीय ग्रंथों में नहीं मिलती — और कई ज्योतिषी इसे कम महत्व देते हैं। हम इसे इसलिए दिखाते हैं क्योंकि लोग पूछते हैं — पर इससे डराकर उपाय कभी नहीं बेचेंगे।

FAQ

काल सर्प दोष कब बनता है?

जब सातों शास्त्रीय ग्रह राहु-केतु अक्ष से बने आधे राशिचक्र में हों। एक भी ग्रह बाहर हो तो दोष नहीं बनता।

क्या काल सर्प दोष शास्त्रों में है?

नहीं — बृहत्पाराशर होरा शास्त्र आदि शास्त्रीय ग्रंथों में इसका उल्लेख नहीं है। यह 20वीं सदी में प्रचलित हुआ, इसलिए कई परंपरागत ज्योतिषी इसे सावधानी से देखते हैं।

काल सर्प के 12 प्रकार कौन से हैं?

राहु के भाव से: अनंत (1), कुलिक (2), वासुकि (3), शंखपाल (4), पद्म (5), महापद्म (6), तक्षक (7), कर्कोटक (8), शंखचूड़ (9), घातक (10), विषधर (11), शेषनाग (12)।

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