ये विवाह तिथियां किसी सूची से नहीं, वास्तविक ग्रह-स्थितियों से गणित हैं। हर तिथि शास्त्रीय विवाह नक्षत्रों व तिथियों पर खरी उतरती है, चातुर्मास व खरमास से बाहर है, सूर्योदय पर भद्रा-रहित है, और शुक्र व गुरु दोनों उदित (अस्त नहीं) हैं।
नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उ.फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उ.आषाढ़ा, उ.भाद्रपद, रेवती। तिथियां: 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13। वर्जित: चातुर्मास (देवशयनी→प्रबोधिनी एकादशी, गणित), खरमास (सूर्य धनु/मीन में), सूर्योदय पर विष्टि करण, शुक्र अस्त (<10°), गुरु अस्त (<11°)। अंतिम चयन में वर-वधू की कुंडलियां भी देखें — हमारा मुफ्त मिलान उपयोग करें।
2027 के कुछ महीनों में विवाह मुहूर्त क्यों नहीं हैं?
लंबे अंतराल गणित वर्जित-कालों से आते हैं: चातुर्मास (लगभग जुलाई–नवंबर), खरमास (सूर्य धनु में मध्य दिसंबर–मध्य जनवरी और मीन में मध्य मार्च–मध्य अप्रैल), और शुक्र/गुरु अस्त की अवधियां।
क्या विवाह पक्का करने के लिए ये तिथियां पर्याप्त हैं?
ये दिन-स्तर की योग्यता हैं। परंपरा में इसके बाद वर-वधू का कुंडली मिलान होता है और चुने दिन पर लग्न-स्तर का समय पारिवारिक ज्योतिषी से निकलवाया जाता है।
ये तिथियां किस शहर के लिए गणित हैं?
सूर्योदय की स्थितियां नई दिल्ली के लिए आंकी गई हैं। भारत भर में तिथियां प्रायः समान रहती हैं; तिथि/नक्षत्र संधि के दिन सुदूर पूर्व-पश्चिम में एक दिन का अंतर संभव है।