कुंडली अनुसार रंग चिकित्सा
हर ग्रह के अपने रंग हैं, और परंपरा उनका उपयोग रत्न व धातु की तरह करती है — किसी ग्रह को प्रतिदिन हल्का बल देने के साधन के रूप में। रंग ज्योतिष का सबसे सस्ता उपाय है और एकमात्र जिसका कोई हानि-पक्ष नहीं।
किसी ग्रह का रंग उसके वार पर धारण करना सामान्य विधान है — लग्नेश का रंग पूरी कुंडली को बल देने के लिए, चंद्र राशि के स्वामी का रंग मन को स्थिर करने के लिए।
रत्न के विपरीत रंग प्रतिवर्ती और सौम्य है, इसीलिए रत्न धारण पर संशय रखने वालों को सबसे पहले यही सुझाया जाता है।
प्रश्न
क्या रंग पूरे दिन पहनना आवश्यक है?
नहीं। परंपरा थोड़ी मात्रा को भी पर्याप्त मानती है — एक धागा, दुपट्टा या वस्त्र।
क्या ये सूर्य-राशि के शुभ रंग जैसे ही हैं?
नहीं। वे केवल पाश्चात्य सूर्य राशि से आते हैं। ये आपके लग्नेश व चंद्र राशि से आते हैं, जिनके लिए जन्म समय व स्थान चाहिए।
यह शास्त्रीय ज्योतिषीय गणना है, चिकित्सा परामर्श नहीं। यहां कुछ भी रोग का निदान या उपचार नहीं करता। कष्ट होने पर चिकित्सक से मिलें — परंपरा स्वयं उपायों को उपचार के साथ बताती है, उसके स्थान पर कभी नहीं।