चिकित्सा ज्योतिष — शरीर मानचित्र व स्वास्थ्य भाव
शास्त्रीय चिकित्सा ज्योतिष बारह राशियों को सिर से पैर तक शरीर पर आरोपित करता है — यही कालपुरुष है। आपका लग्न तय करता है कि यह मानचित्र कहां से आरंभ हो, और षष्ठ भाव व उसका स्वामी रोग के संकेत रखते हैं।
कालपुरुष योजना में मेष सिर से लेकर मीन पैर तक चलती है। अपने लग्न से पढ़ने पर यह दिखाती है कि आपकी कुंडली का कौन सा भाव शरीर के किस अंग का स्वामी है — और वहां कौन से ग्रह बैठे हैं।
यह प्रवृत्तियों का मानचित्र है, निदान नहीं। शास्त्र स्पष्ट कहते हैं कि ज्योतिष संकेत देता है और चिकित्सा उपचार करती है; षष्ठ भाव की पीड़ा बताती है कि कहां सावधान रहना है, यह नहीं कि रोग क्या है।
प्रश्न
क्या कुंडली रोग का निदान कर सकती है?
नहीं, और कोई उत्तरदायी ज्योतिषी ऐसा दावा नहीं करता। कुंडली प्रवृत्ति और संवेदनशील काल दिखाती है। निदान चिकित्सक व जांच से होता है।
स्वास्थ्य कौन सा भाव दिखाता है?
षष्ठ रोग का भाव है, अष्टम दीर्घ व आकस्मिक रोग का, और द्वादश चिकित्सालय व निद्रा का। लग्न व लग्नेश समग्र ओज दिखाते हैं।
क्या दशा के कारण उपचार रोक दें?
बिलकुल नहीं। शास्त्रीय उपाय सदा उपचार के साथ बताए गए हैं, उसके स्थान पर कभी नहीं।
यह शास्त्रीय ज्योतिषीय गणना है, चिकित्सा परामर्श नहीं। यहां कुछ भी रोग का निदान या उपचार नहीं करता। कष्ट होने पर चिकित्सक से मिलें — परंपरा स्वयं उपायों को उपचार के साथ बताती है, उसके स्थान पर कभी नहीं।