आपका मंत्र व ध्यान अभ्यास
दो मंत्र सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं: लग्नेश का, जो पूरी कुंडली को सहारा देता है, और चल रही महादशा का, क्योंकि वही ग्रह इस समय आपके जीवन को गढ़ रहा है।
शास्त्रीय विधान प्रतिदिन 108 जप का है, अथवा ग्रह की अपनी जप-संख्या उसकी अवधि में पूर्ण करने का। मात्रा से अधिक निरंतरता का मूल्य है — प्रतिदिन निभाई गई छोटी संख्या, पखवाड़े में छोड़ी गई बड़ी संख्या से श्रेष्ठ है।
परंपरा मंत्र को रत्न व कर्मकांड से ऊपर रखती है, क्योंकि इसका कोई मूल्य नहीं और यह केवल ध्यान मांगता है।
प्रश्न
जप कब करें?
परंपरा में सूर्योदय पर, पूर्वाभिमुख, ग्रह के वार पर। व्यवहार में वही समय उचित है जिसे आप वास्तव में निभा सकें।
क्या दीक्षा आवश्यक है?
नौ ग्रहों के बीज मंत्र सार्वजनिक हैं और परंपरा में बिना दीक्षा जपे जाते हैं। किसी विशेष संप्रदाय के देव-मंत्र भिन्न विषय हैं।
यह शास्त्रीय ज्योतिषीय गणना है, चिकित्सा परामर्श नहीं। यहां कुछ भी रोग का निदान या उपचार नहीं करता। कष्ट होने पर चिकित्सक से मिलें — परंपरा स्वयं उपायों को उपचार के साथ बताती है, उसके स्थान पर कभी नहीं।